
बांग्लादेश ने बुधवार को पद्मा नदी पर एक बड़ी बांध निर्माण परियोजना को मंजूरी दी। बांग्लादेश का कहना है कि इससे भारत के फरक्का बांध के ‘नकारात्मक प्रभाव’ को कम करने में मदद मिलेगी। यह घटनाक्रम 1996 की भारत-बांग्लादेश गंगा जल बंटवारा संधि की अवधि दिसंबर में समाप्त होने से कुछ महीने पहले सामने आया है। भारत में पद्मा नदी को गंगा कहा जाता है।
तारिक रहमान ने पद्मा नदी पर बांध बनाने की मंंजूरी दी – अधिकारियों ने बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की अध्यक्षता वाली ‘ईसीएनईसी’ (राष्ट्रीय आर्थिक परिषद कार्यकारी समिति) ने परियोजना के पहले चरण को मंजूरी दी। इसकी अनुमानित लागत 34,497.25 करोड़ टका है। जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने पत्रकारों को बताया कि इस परियोजना का एक प्रमुख उद्देश्य बांग्लादेश की ओर पानी का भंडारण कर गंगा पर फरक्का बैराज के प्रभाव को कम करना है।
बांग्लादेश बोला- इस बांध का भारत से कोई संबंध नहीं – उन्होंने दावा किया कि भारत और बांग्लादेश के बीच साझा 54 नदियों से जुड़े मुद्दों का इस परियोजना से संबंध नहीं है। बांग्लादेश के मंत्री ने कहा, “पद्मा बांध बांग्लादेश के अपने हित का मामला है और इस मुद्दे पर भारत से किसी भी प्रकार की चर्चा की आवश्यकता नहीं है।” हालांकि, अनी ने कहा कि गंगा के जल को लेकर भारत के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने कहा, “गंगा के संबंध में चर्चा आवश्यक है और वह जारी है।”
फरक्का बांध क्या है? – फरक्का बैराज पश्चिम बंगाल राज्य के मुर्शिदाबाद जिले में गंगा नदी पर बना एक बैराज है। यह साहिबगंज के पास बांग्लादेश सीमा से लगभग 18 किलोमीटर दूर स्थित है ।
फरक्का बैराज का निर्माण 1962 में शुरू हुआ और 1 अरब डॉलर की लागत से 1970 में पूरा हुआ। यह 21 अप्रैल 1975 को चालू हुआ।
फरक्का बैराज लगभग 2,304 मीटर (7,559 फीट) लंबा है। इस बैराज से भागीरथी-हुगली नदी तक जाने वाली सहायक नहर निकलती है, जो लगभग 42 किलोमीटर लंबी है।
इस बांध का निर्माण हिंदुस्तान कंस्ट्रक्शन कंपनी ने किया था। इसके 109 फाटकों में से 108 नदी के ऊपर हैं और एक फाटक मालदा के निचले इलाके में एहतियात के तौर पर बनाया गया है।
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