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भारत के खिलाफ श्रीलंका को भड़का रहा चीन, संप्रभुता और गरिमा का दिया हवाला, जानें मामला


चीन का भारत विरोधी अभियान पूरे जोर-शोर से जारी है। इस बार उसने श्रीलंका को अपना मोहरा बनाने की कोशिश की है। चीनी राजनयिक श्रीलंका को भारत के खिलाफ भड़काने में जुटे हैं। हाल में ही चीनी राजदूत ने एक कार्यक्रम के दौरान श्रीलंका की भविष्य की नीतिगत फैसलों में ‘संप्रभुता और गरिमा’ बनाए रखने की अपील की है। चीनी राजनयिक ने भारत का नाम लिए बिना कहा है कि श्रीलंका को अपनी संप्रभुता से समझौता नहीं करना चाहिए। उनका इशारा श्रीलंका में भारत के बढ़ते निवेश और दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक संबंधों की ओर था।
कोलंबो में “कोलंबो मैरीटाइम डायलॉग” को संबोधित करते हुए श्रीलंका में चीन के राजदूत, क्यूई झेनहोंग ने इस मंच को संबोधित करते हुए मेज़बान देश को “हिंद महासागर का मोती” बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह क्षेत्र बड़ी ताकतों के बीच मुकाबले का अखाड़ा बनने के बजाय “आपसी फायदे के लिए एक व्यापक मंच” होना चाहिए। राजदूत क्यूई ने पूरब-पश्चिम व्यापार मार्गों पर श्रीलंका की भौगोलिक स्थिति के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के आर्थिक विकास और जन कल्याण के लिए समुद्री सहयोग बेहद जरूरी है।
श्रीलंका की संप्रभुता और गरिमा का दिया हवाला – चीनी राजदूत ने 2025 में राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके की चीन यात्रा के बाद से हुई प्रगति का ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि दोनों देश समुद्री क्षेत्र की जानकारी (मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस) और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में अपने संबंधों को और गहरा करने पर सहमत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान और साझेदारियों के संबंध में एक अहम टिप्पणी करते हुए, राजदूत ने उम्मीद जताई कि श्रीलंकाई सरकार भविष्य के फ़ैसले “अपनी संप्रभुता, गरिमा और हितों को ध्यान में रखते हुए” लेगी। इस चर्चा का समापन इस अपील के साथ हुआ कि हिंद महासागर को शांति और स्थिरता का क्षेत्र बनाए रखने के लिए खुली बातचीत का सिलसिला जारी रहना चाहिए।