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CJI सूर्यकांत बोले- अगर अधिकारों का इस्तेमाल न किया जाए, तो कागजों पर इनके लिखे होने का कोई मतलब नहीं


देहरादून में आयोजित एक सम्मेलन में CJI सूर्य कांत ने कहा कि जो अधिकार व्यवहार में इस्तेमाल ही नहीं हो सकते, वे केवल कागजी वादे बनकर रह जाते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत की न्याय प्रणाली में अधिकारों की कमी नहीं है, बल्कि असली चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि आम लोग उन अधिकारों का वास्तविक लाभ उठा सकें।
मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि न्याय व्यवस्था की सफलता इस बात से आंकी जाएगी कि आम नागरिक अपने अधिकारों का उपयोग कितनी आसानी से कर पा रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अधिकार केवल कागजों तक सीमित रह जाएं, तो उनका कोई वास्तविक महत्व नहीं रह जाता।
सम्मेलन के दौरान उन्होंने ‘न्याय मित्र’ पोर्टल का शुभारंभ किया, जिसका उद्देश्य आम लोगों के लिए न्याय से जुड़ी सेवाओं को अधिक सुलभ बनाना है। यह पोर्टल खासतौर पर उन लोगों की मदद करेगा जो दूरदराज क्षेत्रों में रहते हैं और जिन्हें अदालतों तक पहुंचने में कठिनाई होती है। उन्होंने कहा कि देश के कई हिस्सों में भौगोलिक दूरी, कमजोर बुनियादी ढांचा और आर्थिक बाधाएं लोगों को न्याय पाने से रोकती हैं। इन चुनौतियों को दूर करना न्याय व्यवस्था की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।