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फाइटर जेट, तीस्‍ता बंदरगाह… चीन से क्‍या चाहते हैं तारिक रहमान, भारत से अमेरिका तक की रहेगी नजर


इस साल की शुरुआत में बांग्लादेश के पीएम का पद संभालने वाले तारिक रहमान चीन की यात्रा पर जा रहे हैं। रहमान चार दिन की आधिकारिक यात्रा के लिए 23 जून को चीन पहुंचेंगे। इस दौरे की शुरुआत आर्थिक पहलू से होगी, जब तारिक डालियान में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम समर दावोस (न्यू चैंपियंस की 17वीं सालाना बैठक) में शामिल होंगे। उनके दौरे से ढाका को आर्थिक के अलावा रक्षा और दूसरे क्षेत्रों में भी काफी उम्मीदे हैं। ऐसे में उनके इस दौरे पर भारत और अमेरिका की भी नजर जमी हुई है।
एशिया टाइम्स के मुताबिक, बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने से पहले तारिक रहमान WEF के अंतरिम प्रेसिडेंट और CEO एलॉइस ज़्विंगी से बातचीत करेंगे। एक मल्टीलेटरल इकोनॉमिक फोरम से शुरुआत करके ढाका को अहम रणनीतिक बातचीत में उतरने से पहले इस दौरे को कमर्शियल नजरिए से पेश करने का मौका मिलता है।
बांग्लादेश में चीनी निवेश – बांग्लादेश के पास अभी चीनी सरकार एशियन इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट बैंक और न्यू डेवलपमेंट बैंक के साथ 9 अरब डॉलर से ज्यादा के फाइनेंसिंग प्रस्ताव लंबित हैं। ढाका कई अटके प्रोजेक्ट के लिए बीजिंग से 4.34 अरब डॉलर की मांग कर रहा है। इनमें तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन का विवादित प्रोजेक्ट, मोंगला पोर्ट विस्तार और चट्टोग्राम के अनवारा में चीनी आर्थिक और औद्योगिक जोन शामिल हैं।
ढाका के अधिकारियों को उम्मीद है कि इस दौरे के दौरान एक दर्जन से ज्यादा मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। इनमें इलेक्ट्रिक व्हीकल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, रिन्यूएबल एनर्जी, बैंकिंग सहयोग और संभावित करेंसी स्वैप शामिल हैं। रहमान कई कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि के तौर पर भी शामिल होंगे।
चीनी जेट पर बांग्लादेश की नजर – बांग्लादेश चुपचाप चीन में बने 20 J-10CE मल्टीरोल फाइटर जेट खरीदने के लिए 2.2 अरब डॉलर की डील को अंतिम रूप दे रहा है। इस पैकेज में हर एयरक्राफ्ट के लिए 6 करोड़ डॉलर (20 जेट के बेड़े के लिए 1.2 अरब डॉलर) तय किए गए हैं। बाकी 82 करोड़ डॉलर ट्रेनिंग, लॉजिस्टिक्स, स्पेयर पार्ट्स, ट्रांसपोर्ट, इंश्योरेंस और इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होंगे।
इस खरीद से बांग्लादेश दक्षिण एशिया का दूसरा देश (पाकिस्तान के बाद) बन जाएगा, जो J-10CE का इस्तेमाल करेगा। यह इस क्षेत्र में चीनी मिलिट्री हार्डवेयर के सबसे बड़े विस्तार को दिखाएगा। ढाका की पिछली अंतरिम सरकार ने व्यापक मिलिट्री समीक्षा के बाद इस डील को सैद्धांतिक रूप से मंजूरी दे दी थी। मौजूदा सरकार अब इसे अंतिम रूप दे रही है।
अमेरिका की क्यों लगी नजर – अमेरिका इन सब पर निश्चित ही बारीकी से नजर रखेगा। 18 फरवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का प्रधानमंत्री रहमान को भेजा गया बधाई संदेश था। इसमें ट्रंप ने लिखा था कि आप उन सामान्य रक्षा समझौतों को पूरा करने के लिए निर्णायक कदम उठाएं, जिनसे आपकी सेना को आखिरकार अमेरिका में बने हाई-एंड उपकरण मिल सकेंगे।
बांग्लादेश के लिए बड़ी समस्या यह है कि वॉशिंगटन ने व्यापारिक पहुंच को सीधे सुरक्षा नियमों के पालन से जोड़ा है। पूर्व की अंतरिम सरकार के व्यापार समझौते में कई शर्तें शामिल थीं। समझौता बांग्लादेश को उन देशों से परमाणु रिएक्टर, ईंधन रॉड या संवर्धित यूरेनियम खरीदने से रोकता है, जिन्हें अमेरिकी हितों के लिए खतरा माना जाता है।
भारत की क्या है फिक्र – भारत की अपनी चिंताएं हैं। पिछले साल जुलाई में दिल्ली में एक कार्यक्रम में बोलते हुए चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा था कि चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच हितों का संभावित मेल क्षेत्रीय स्थिरता के लिए गंभीर परिणाम ला सकता है। इससे बांग्लादेश के रणनीतिक झुकाव का सवाल भारत की सुरक्षा संबंधी गणनाओं के केंद्र में आ गया है।
बांग्लादेश ने तीस्ता नदी के व्यापक प्रबंधन और बहाली प्रोजेक्ट के लिए 550 मिलियन डॉलर के चीनी लोन का औपचारिक अनुरोध किया है। यह एक ऐसी योजना है, जिसके तहत 140 मिलियन क्यूबिक मीटर गाद निकाली जाएगी, 171 वर्ग किलोमीटर जमीन को हासिल किया जाएगा और उत्तरी जिलों में सैकड़ों किलोमीटर लंबे तटबंधों का पुनर्निर्माण किया जाएगा।