
सऊदी अरब प्रस्तावित ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEC) में एक बड़ा बदलाव करने पर विचार कर रहा है। सऊदी का मोहम्मद बिन सलमान के नेतृत्व वाला शासन इस कॉरिडोर को सीरिया से गुजारने की योजना बना रहा है। इजरायल को इस प्रोजेक्ट से दरकिनार करने के लिए सीरिया को इसमें शामिल किया जा रहा है। प्रोजेक्ट में सीरिया की एंट्री ना सिर्फ इजरायल बल्कि भारत के लिए भी बड़ा झटका होगा। भारत ने इस पहल में काफी संभावना देखी है।
इजरायली अखबार द यरूशलम पोस्ट ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब का IMEC से इजरायल को बाहर कर सीरिया को लाने की वजह पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम हैं। खासतौर से गाजा और लेबनान में इजरायल के हमलों की वजह से सऊदी चाहता है कि वह यहूदी देश से दूरी बनाकर रखे।
2023 में हुई शुरुआत – IMEC को सितंबर 2023 में नई दिल्ली में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने पेश किया था। इसे एक क्रांतिकारी इंफ्रास्ट्रक्चर और व्यापार परियोजना के तौर पर सोचा गया था, जो खाड़ी और पूर्वी भूमध्य सागर के जरिए भारत को यूरोप से जोड़ेगी।
IMEC पहल में रेलवे, बंदरगाहों और शिपिंग लेन का एक नेटवर्क बनाने की योजना है, जो भारत को संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, जॉर्डन, इज़राइल और ग्रीस से जोड़ेगा। इससे पारंपरिक समुद्री मार्गों की तुलना में तेजी से व्यापार हो सकेगा और पूरे क्षेत्र में आर्थिक एकीकरण मजबूत होगा।
IMEC में इजरायल – IMEC की शुरुआत से ही इसमें इजरायल की भूमिका को सऊदी अरब से उसके संबंधों को सामान्य बनाने की अमेरिकी कोशिशों के तहत देखा गया। इसकी मूल योजना में भारत से माल सऊदी अरब से रेल से जॉर्डन होते हुए इजरायल पहुंचता और फिर हाइफा बंदरगाह से यूरोपीय बाजारों में भेजा जाता। इससे इजरायल एशिया और यूरोप के बीच अहम लॉजिस्टिकल गेटवे बन जाता।
इस परियोजना की घोषणा के तीन साल बाद अरब के क्षेत्रीय हालात काफी ज्यादा बदल गए हैं। गाजा में युद्ध और इजरायल-सऊदी संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही प्रक्रिया के रुक जाने के कारण रियाद को परियोजना के रास्ते पर फिर से विचार करना पड़ रहा है। सऊदी अधिकारी अब सक्रिय रूप से ऐसे विकल्पों पर विचार कर रहे हैं, जिनसे कॉरिडोर से इजरायल को हटाया जा सके।
सीरिया से गुजरेगी रेलवे लाइन! – सऊदी अरब इजरायल की जगह रेलवे लाइन को सीरिया से होकर ले जाने पर विचार कर रहा है। इससे खाड़ी से भूमध्य सागर तक एक जमीनी रास्ता (लैंड ब्रिज) बन जाएगा और यह इजरायल के इलाके से नहीं गुजरेगा। सऊदी कुछ दूसरे विकल्पों पर भी विचार कर रहा है लेकिन इसमें सबसे अहम सीरिया है।
सऊदी अगर इस प्लान को जमीन पर उतारता है यानी IMEC का रास्ता सीरिया से जाता है तो यह इजरायल के लिए एक बड़ा रणनीतिक झटका होगा। इजरायल को इस कॉरिडोर से उम्मीद थी कि सऊदी अरब के साथ संबंधों को सामान्य बनाने के समझौते के बाद यह ना केवल एक आर्थिक संपत्ति बनेगा, बल्कि गहरे क्षेत्रीय एकीकरण की आधारशिला भी साबित होगा।
भारत की क्यों बढ़ी टेंशन – सऊदी अरब का प्लान इजरायल के साथ-साथ भारत के लिए भी बड़ा झटका साबित होगा। भारत ने इस कॉरिडोर को अरब और यूरोप पर पहुंच बढ़ाने के तौर पर देखा है। खासतौर से अडानी समूह ने इजरायल के हाइफा पोर्ट पर भारी निवेश किया है। यह पोर्ट इस प्रोजेक्ट का बेहद अहम बिंदु है। इजरायल और हाइफा का प्रोजेक्ट से बाहर होना भारत की चिंता बढ़ाएगा।
सीरिया से इस प्रोजेक्ट का गुजरना भी भारत को असहज करेगा। सीरिया की मौजूदा सरकार को अमेरिका और तुर्की का करीबी माना जाता है लेकिन राष्ट्रपति अहमद अल-शरा पूर्व में घोषित आतंकी रह चुके हैं। ऐसे में इस सरकार से जुड़ना भारत के लिए आसान नहीं होगा। वहीं सीरिया में अस्थिरता को देखते हुए भी भारत हिचकाएगा।
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