
देश में सोना खरीदने में कमी आई है। 27 मई को खत्म हुए पखवाड़े में सोने की डिमांड बीते एक साल में करीब 25 टन से गिरकर करीब 7.5 टन रह गई है। इसके पीछे बीते सोने पर आयात शुल्क यानी इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील का असर बताया जा रहा है। बीते 13 मई से सोने पर आयात शुल्क 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया था। खास बात यह है कि पीएम मोदी की साल भर सोना नहीं खरीदने की अपील का असर दक्षिण भारत में ज्यादा देखने को मिला है। इसका मतलब यह है कि दक्षिण भारत में जहां बीजेपी का शासन नहीं है, वहां भी पीएम की अपील का असर पड़ा है।
दक्षिण भारत में सोने की खपत में आई कमी – द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण भारत में सोने की खपत कम हुई है, जो पारंपरिक रूप से देश के सबसे बड़े सोने के उपभोक्ताओं में से एक है। ज्वैलर्स के अनुसार, कुछ उपभोक्ता हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों की ओर रुख कर रहे हैं, जबकि पुराने सोने की बिक्री में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
भीमा ज्वैलरी के चेयरमैन बी गोविंदन ने कहा, ‘उपभोक्ता अपने बजट को नहीं बढ़ा रहे हैं। वे अपने बजट के अनुसार ही खरीद रहे हैं और इसलिए हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों को चुन रहे हैं। इसके विपरीत पुराने सोने को बेचकर नकद लेने के लिए उपभोक्ताओं में भारी होड़ मची हुई है।’
उपभोक्ता अपने बजट को नहीं बढ़ा रहे हैं। वे अपने बजट के अनुसार ही खरीद रहे हैं और इसलिए हल्के और कम कैरेट वाले आभूषणों को चुन रहे हैं। इसके विपरीत पुराने सोने को बेचकर नकद लेने के लिए उपभोक्ताओं में भारी होड़ मची हुई है। बी गोविंदन, भीमा ज्वैलरी के चेयरमैन
सोने की डिमांड में आई 70 फीसदी कमी – द इकनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंडिया बुलियन एंड जूलर्स एसोसिएशन ( IBJA ) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने बताया है कि सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाए जाने के बाद डिमांड में 70 फीसदी गिरावट आई है। सबसे ज्यादा मार असंगठित कारोबार पर पड़ी है जो कुल ट्रेड का करीब 65 फीसदी है। देश में सोने की सालाना खपत 800 से 850 टन है।
इसके अलावा, पीएम की साल भर तक सोना न खरीदने की अपील ने भी असर डाला है। पीएम ने दक्षिण में जाकर सिकंदराबाद की सभा में ये अपील की थी। ऐसे में माना जा रहा है कि दक्षिण भारत में सोने की खपत में आई कमी का एक ये मतलब हो सकता है कि बीजेपी का असर दक्षिण के राज्यों मेंं बढ़ रहा है।
सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए हमारी देशभक्ति हमें चुनौती दे रही है और हमें यह स्वीकार करके विदेशी मुद्रा बचानी होगी। नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री
सोने की खरीद में विराम, घबराहट में खरीदारी – उद्योग जगत के अधिकारियों ने आयात शुल्क में बढ़ोतरी के कई क्षेत्रों पर पड़ने वाले अलग-अलग प्रभावों पर ध्यान दिया। कई खुदरा विक्रेताओं ने खरीद में विराम का संकेत दिया।
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूजीसी) की अनुसंधान प्रमुख कविता चाको ने कहा, ‘घोषणा के बाद बड़े चेन स्टोरों में कुछ समय के लिए घबराहट में खरीदारी देखी गई, जिसका कारण आगे और उपायों की आशंका थी। हालांकि, वे बिक्री में मंदी की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन इन्वेंट्री बफर और दुल्हन के गहनों की मांग से मिल रहे निरंतर समर्थन के कारण वे अपेक्षाकृत मजबूत स्थिति में हैं।’
उन्होंने आगे कहा कि मध्यम आकार के और क्षेत्रीय ज्वैलर्स को धनी ग्राहकों से मांग मिलती रहेगी, लेकिन आगे चलकर वे सोने के विनिमय कार्यक्रमों और इन्वेंट्री चक्रों को और अधिक नियंत्रित करने पर निर्भर रहेंगे। चाको ने कहा, छोटे खुदरा विक्रेता सबसे अधिक असुरक्षित दिखाई दे रहे हैं। लगातार ज्यादा कीमतों से पहले से ही जूझ रहे इन खुदरा विक्रेताओं पर अब बिक्री की मात्रा और लाभ मार्जिन को लेकर अतिरिक्त दबाव है।
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