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होर्मुज के पास अब बचे हैं केवल 9 भारतीय जहाज, लेकिन इसबार मकसद कुछ और; अधिकारियों ने दिया नया अपडेट


मंगलवार तक, 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से भारत आने वाले सामान के साथ भारतीय और विदेशी झंडे वाले 50 जहाजों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार किया है लेकिन अब भी वहां 9 भारतीय जहाज मौजूद हैं। ये भारतीय जहाज होर्मुज के पश्चिमी क्षेत्र में मौजूद हैं। खबर यह चल रही थी कि ये भारतीय जहाज अब भी फंसे हुए हैं लेकिन अब पता चला है कि ये फंसे नहीं हैं बल्कि इनका मकसद कुछ और है।
सभी 9 जहाज फंसे नहीं हैं बल्कि व्यापार के मकसद से मौजूद – जहाजरानी मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि जहाज फंसे नहीं हैं और अभी इस क्षेत्र में व्यापार या काम कर रहे हैं। इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि क्या भारत के जहाज नए सामान लेने के लिए जलडमरूमध्य से होते हुए पश्चिम एशिया जाने का इंतजार कर रहे हैं। इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि शिपिंग कंपनियों को इस क्षेत्र में अपने जहाज फिर से भेजने की योजना बनाने में थोड़ा और समय लग सकता है।
अधिकारियों ने बताया कि जहां 18 जहाजों ने सुरक्षित रूप से जलडमरूमध्य को पार किया है, वहीं बाकी 32 विदेशी झंडे वाले जहाज हैं। अब तक जिन जहाजों ने इसे पार किया है, उनमें सबसे ज्यादा 19 बल्क कैरियर हैं, 14 में LPG थी और 12 कच्चे तेल के टैंकर थे। बाकी जहाजों में दो LNG कैरियर और एक कंटेनर जहाज शामिल हैं।
कामराजर 18 मीटर ड्राफ्ट की सुविधा देने वाला दूसरा प्रमुख बंदरगाह बना – तमिलनाडु का कामराजर बंदरगाह, जिसका ऑपरेशनल ड्राफ्ट 18 मीटर है, विशाखापत्तनम बंदरगाह के बाद केंद्र सरकार के स्वामित्व वाला या प्रमुख बंदरगाहों में से दूसरा ऐसा बंदरगाह बन गया है जिसने यह उपलब्धि हासिल की है।
शिपिंग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह आधुनिक, भविष्य के लिए तैयार समुद्री बुनियादी ढांचा बनाने की यात्रा में एक और मील का पत्थर है, जो भारत की आर्थिक वृद्धि और वैश्विक व्यापार को गति देगा।