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ट्रंप ने ईरान के आगे टेके घुटने, देंगे 300 अरब डॉलर, शांति समझौते के 14 प्वाइंट को समझें


डोनाल्ड ट्रंप युद्ध से भागने के लिए इस तरह बेताब थे कि उन्होंने ईरान को 300 अरब डॉलर का पुननिर्माण पैकेज देने का वादा किया है। शुक्रवार को होने वाले समझौते पर दस्तखत के कार्यक्रम से पहले ईरान की अर्ध-सरकारी समाचार एजेंसी ‘मेहर’ ने वॉशिंगटन और तेहरान के बीच 14-सूत्रीय सहमति पत्र (MOU) का मसौदा प्रकाशित किया है। किसी भी सरकार ने आधिकारिक तौर पर इन जानकारियों की पुष्टि नहीं की है और इन बिंदुओं को ईरानी सरकारी मीडिया के दावे के तौर पर ही देखा जाना चाहिए जब तक कि इनकी पुष्टि न हो जाए। लेकिन अगर ये सही हैं तो ये ईरान की जीत है।
इस मसौदे की सबसे खास बात ये है कि अमेरिका ने ईरान को पुननिर्माण के लिए 300 अरब डॉलर देने का वादा किया है और तेहरान को तत्काल 24 अरब डॉलर मिलेंगे। इसके अलावा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रविवार को ईरानी सरकारी मीडिया की तरफ से जारी एक ड्राफ्ट मेमोरेंडम ऑफ़ अंडरस्टैंडिंग (समझौता ज्ञापन) के विवरण के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच लड़ाई खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर सहमति बनी है। हालांकि अभी तक अमेरिका ने इसकी पुष्टि नहीं की है।
ईरान कैसे अमेरिका पर विजयी दिख रहा है? – भारत के जियो पॉलिटिकल एक्सपर्ट नितिन गोखले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है ‘अगर मेहर न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका और ईरान के बीच हुए MoU की जानकारी सही है तो यह साफ है कि अमेरिका यह जंग हार गया है। हालांकि यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि अलग-अलग देश इस समझौते को किस तरह अलग-अलग नजरिए से देखेंगे।’
1- ईरान- आर्थिक रूप से कमजोर होने और अपनी सैन्य ताकत में काफी कमी आने के बावजूद तेहरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों का सामना किया। ना सिर्फ सामना किया बल्कि उतनी ही मजबूती से पलटवार भी किया। ईरान अमेरिका के सामने झुका नहीं जो उसकी जीत है। उसे मुआवजा भी मिला है और उसकी फ्रीज की हुई संपत्ति भी अमेरिका जारी करने पर मजबूर हुआ है। लेबनान में हिज्बुल्लाह की पकड़ भी मजबूत बनी रहेगी। ईरान अब खाड़ी देश में और ताकतवर हो चुका है जबकि सऊदी, यूएई और तुर्की जैसे देश जो इस्लामिक लीडर बनने की कोशिश करते रहे हों वो पीछे छूट गये हैं।
2- अमेरिका- अमेरिका की हालत ऐसी हो गई थी वो इस युद्ध से भागने के लिए हाथ पैर मार रहा था। जैसे कोई डूबता हुआ आदमी मारता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप युद्ध खत्म करने और नुकसान कम करने के लिए बेताब थे। आखिरकार शायद उन्होंने गैस की बढ़ती कीमतों और अमेरिका में होने वाले मध्यावधि चुनावों को ध्यान में रखते हुए ईरान की ज्यादातर मांगें मान लीं। इसमें कोई शक नहीं कि इससे उनकी साख को भारी नुकसान पहुंचा है।
3- इजरायल आगे भी लड़ता रहेगा लेकिन नेतन्याहू की मुश्किलें बढ़ेंगी। ईरान अब ये संदेश देगा कि वो इजरायल पर भारी पड़ गया है और वर्षों से इजरायल ने जो अपनी विजेता वाली छवि बनाए रखी थी वो कमजोर हो चुकी है। इजरायल के हाथ कुछ भी नहीं आया है सिवाय इस आश्वासन के कि ईरान परमाणु बम नहीं बनाएगा।
4- पाकिस्तान- पाकिस्तान अंत में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौता करवाने में नाकाम रहा। अंत में वो कतर था जिसने दोनों देशों के बीच समझौता करवाया।
5- भारत- होर्मुज स्ट्रेट खुलने से भारत को राहत मिलेगी लेकिन भारत की विदेश नीति पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। नई दिल्ली को पश्चिम एशिया के प्रति अपनी नीति, अमेरिका के साथ अपने संबंधों (जो अब पहले से कहीं ज्यादा तनावपूर्ण हैं) और ऊर्जा के स्रोतों में विविधता लाने पर फिर से विचार करना होगा।