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राफेल vs सुखोई Su-30SM: आमने-सामने आए दो ‘आसमानी दिग्गज’, बाल-बाल बची मुठभेड़


रोमानिया पर ड्रोन हमले के बाद रूस और नाटो के बीच तनाव चरम पर है। इस बीच फ्रांस ने दावा किया है कि उसके राफेल लड़ाकू विमानों ने दो रूसी सुखोई Su-30SM लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया है। बताया गया कि ये रूसी लड़ाकू विमान नाटो देशों की सीमा का उल्लंघन करने वाले थे। ये बिना किसी उड़ान योजना के बाल्टिक हवाई क्षेत्र में घुस आए थे। इससे पहले ही राफेल लड़ाकू विमानों ने उन दोनों सुखोई Su-30SM लड़ाकू विमानों को खदेड़ दिया। इन राफेल विमानों ने लिथुआनिया के शियाउलियाई एयर बेस से उड़ान भरी थी।
फ्रांसीसी सेना ने जारी किया फुटेज – फ्रांस के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने इस कार्रवाई का फुटेज जारी किया और पुष्टि की कि यह अलर्ट बहुत कम समय के नोटिस पर जारी किया गया था। फ्रांसीसी सेना के आधिकारिक पोस्ट में बताया गया कि ये विमान बिना अनुमति के बाल्टिक देशों के हवाई क्षेत्र में घुस आए थे, जिसके बाद राफेल विमान उन्हें बाहर निकालने के लिए शियाउलियाई से रवाना हुए। राफेल को आता देख रूसी लड़ाकू विमान पीछे लौट गए। इस दौरान किसी भी तरह का कोई डॉगफाइट नहीं हुआ था।
रूसी सीमा पर राफेल तैनात – Su-30SM रूस में बना चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान है। यह उसी प्रकार का विमान है जिसे फ्रांस के राफेल विमान 31 मार्च, 2026 को स्पेन से NATO के बाल्टिक हवाई निगरानी मिशन की कमान संभालने के बाद से लगातार ट्रैक कर रहे हैं। अप्रैल में, फ्रांसीसी सेना ने एक ही सप्ताह में चार बार आपातकालीन उड़ानें भरीं, और छह रूसी सैन्य विमानों की पहचान कर उन्हें बाहर तक एस्कॉर्ट किया; इनमें एक Su-30SM और एक Il-20M इलेक्ट्रॉनिक खुफिया विमान शामिल था।
लिथुआनिया में नाटो का बड़ा सैन्य अड्डा – नाटो ने लिथुआनिया में रूसी सीमा से लगभग 130 किमी दूर शियाउलियाई में एक बड़ा एयरबेस बनाया है। इसे 2004 में शुरू कुया गया था। इसके बाद से यह एयरबेस बाल्टिक देशों के लिए NATO के प्राथमिक हवाई निगरानी केंद्र के रूप में कार्य कर रहा है। इस बेस पर सहयोगी देशों के लड़ाकू विमानों की टुकड़ियां लगभग चार महीने के रोटेशन पर तैनात रहती हैं और इनमें से प्रत्येक टुकड़ी तीनों बाल्टिक देशों की निरंतर हवाई सुरक्षा के लिए जिम्मेदार होती है। फ्रांस ने वर्तमान रोटेशन की अगुवाई करने के लिए चार राफेल B लड़ाकू विमान और 100 से अधिक सैन्य कर्मियों को तैनात किया है, जिसमें रोमानिया भी बराबर रूप से अपना योगदान दे रहा है।