
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने आज रात ईरान पर होने वाले हमले को रद्द कर दिया है। इससे कुछ घंटे पहले ही उन्होंने ईरान पर भीषण बमबारी करने और उसके तेल निर्यात के मुख्य केंद्र खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की धमकी दी थी। ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ अमेरिका की बातचीत ऊंचे स्तर तक पहुंच गई है और उसे मंजूरी मिल गई है। इस कारण उन्होंने ईरान पर होने वाले हमले और बमबारी के आदेश को रद्द कर दिया है।
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर क्या लिखा? – ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, “इस बात को ध्यान में रखते हुए कि ईरान के साथ बातचीत ईरानी नेतृत्व के सबसे ऊंचे स्तर तक पहुंच गई है और उसे मंजूरी मिल गई है, अमेरिका के राष्ट्रपति के तौर पर मैंने आज शाम ईरान के ख़िलाफ़ तय हमले और बमबारी को रद्द कर दिया है। बातचीत और अंतिम बिंदुओं को—चाहे वे मूल विचार हों या विस्तृत विवरण—सभी संबंधित पक्षों ने मंजूरी दे दी है।”
ट्रंप ने पाकिस्तान का भी लिया नाम – ट्रंप ने आगे लिखा कि, “इन पक्षों में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजरायल, सऊदी अरब, UAE, कतर, तुर्की, पाकिस्तान, बहरीन, कुवैत, जॉर्डन, मिस्र और अन्य देश शामिल हैं। जब तक यह समझौता अंतिम रूप नहीं ले लेता, तब तक नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी—समझौते पर हस्ताक्षर करने का समय और स्थान जल्द ही बताया जाएगा।”
ट्रंप ने पहले क्या कहा था? – ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में धमकी दी थी कि अमेरिका आज रात ईरान पर ‘‘बहुत जोरदार हमला’’ करेगा और ‘‘बहुत जल्द’’ ईरान के तेल और गैस उद्योगों—जिनमें भी शामिल है—पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति की यह धमकी ऐसे समय आई है, जब युद्ध समाप्त कराने के लिए कूटनीतिक बातचीत गतिरोध में फंसी नजर आ रही है। ट्रंप ने ईरान के लिए अपनी योजनाओं की तुलना उस स्थिति से की, जब अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के तत्कालीन राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल सेक्टर पर नियंत्रण कर लिया था।
खर्ग द्वीप पर कब्जा करना चाहते हैं ट्रंप – खर्ग द्वीप कुवैत और सऊदी अरब में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों के ठीक सामने फारस की खाड़ी के दूसरे छोर पर स्थित है। इसे ईरान के तेल उद्योग की जीवनरेखा माना जाता है। देश के लगभग 90 प्रतिशत तेल निर्यात इसी द्वीप के जरिए होते हैं। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मेरी प्राथमिकता हमेशा खर्ग द्वीप पर कब्जा करने की रही है। सच कहूं तो मुझे नहीं पता कि अमेरिका इसके लिए आवश्यक राजनीतिक इच्छाशक्ति या जोखिम उठाने का साहस रखता है या नहीं।’’
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