Tuesday , July 14 2026 1:23 PM
Home / News / देश के नए नौसेना प्रमुख बने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, 31 मई को करेंगे कार्यभार ग्रहण

देश के नए नौसेना प्रमुख बने वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन, 31 मई को करेंगे कार्यभार ग्रहण


वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन को देश का नया नौसेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। वे वर्तमान में मुंबई में पश्चिमी नौसेना कमांडर हैं और 31 मई को कार्यभार ग्रहण करेंगे। उनका कार्यकाल 31 दिसंबर, 2028 तक रहेगा। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन 1 जुलाई, 1987 को भारतीय नौसेना में कमीशन प्राप्त हुए थे और संचार एवं इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विशेषज्ञ हैं।
उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, खड़कवासला; संयुक्त सेवा कमान एवं स्टाफ कॉलेज, श्रीवेनहैम, यूनाइटेड किंगडम; कॉलेज ऑफ नेवल वॉरफेयर, करंजा; और संयुक्त राज्य नौसेना युद्ध कॉलेज, न्यूपोर्ट, रोड आइलैंड, यूएसए से शिक्षा प्राप्त की है।
कौन हैं वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन – वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन ने अपने करियर के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण जहाजों विमानवाहक पोत INS विक्रमादित्य, गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर INS मैसूर, मिसाइल कार्वेट INS कुलिश की कमान संभाल चुके हैं।
शिक्षा की बात करें तो वे नेशनल डिफेंस एकेडमी (खड़कवासला) के पूर्व छात्र हैं।
इसके अलावा उन्होंने यूनाइटेड किंगडम, अमेरिका और मुंबई विश्वविद्यालय से उच्च सैन्य और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में शिक्षा प्राप्त की है।
वाइस एडमिरल कृष्णा स्वामीनाथन के पास अंतरराष्ट्रीय अध्ययन में पीएचडी (PhD) की डिग्री भी है।
सम्मान की बात करें तो उनकी विशिष्ट सेवा के लिए उन्हें परम विशिष्ट सेवा पदक (PVSM), अति विशिष्ट सेवा पदक (AVSM) और विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया जा चुका है।
दक्षिणी नौसेना कमांड में चीफ स्टाफ ऑफिसर (ट्रेनिंग) के तौर पर उन्होंने नौसेना की ट्रेनिंग सिस्टम को आधुनिक बनाने में योगदान दिया है।
उनकी नियुक्ति से नौसेना के आधुनिकीकरण, स्वदेशी रक्षा तकनीक और समुद्री सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने पर विशेष फोकस रहने की उम्मीद है।
नौसेना प्रमुख का काम क्या होता है? – भारतीय नौसेना के प्रमुख का मुख्य कार्य भारतीय नौसेना की कमान संभालना, समुद्री सीमाओं की रक्षा करना, और युद्ध/शांति के समय नौसेना के परिचालन और आधुनिकीकरण की देखरेख करना है। वे सरकार को समुद्री सुरक्षा पर सलाह देने वाले सर्वोच्च अधिकारी होते हैं। इसके अलावा वह नौसैनिकों के बीच समन्वय स्थापित करते हैं।