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यूक्रेन में भारतीय सैनिक भेजने के पीछे क्या था JD वेंस का मकसद जिसे ट्रंप ने किया खारिज, पुतिन का डर?


अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने यूक्रेन के लिए एक शांति योजना पेश की थी, जिसमें भारतीय सैनिकों को शामिल करने का प्लान था। वेंस ने जनवरी 2025 में ओवल ऑफिस में हुई एक मीटिंग के दौरान ट्रंप के सामने यह सुझाव दिया था। यह बैठक डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण के 10 दिन बाद 30 जनवरी को हुई थी, जिसका खुलासा हाल ही में छपी एक किताब ‘रिजीम चेंज: इनसाइड द इंपीरियल प्रेसिडेंसी ऑफ डोनाल्ड ट्रंप’ में हुआ है। मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान की लिखी यह किताब मंगलवार को बाजार में उतारी गई है।
रिजीम चेंज नाम की किताब के अनुसार, “ओवल ऑफिस (अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय) में हुई बैठक में वेंस ने सुझाव दिया था कि रूस के साथ चल रही जंग में युद्धविराम सुनिश्चित करने के लिए भारतीय सैनिक यूक्रेन में शांति मिशन का हिस्सा बन सकते हैं। हालांकि, ट्रंप ने तुरंत ही वेंस के प्रस्ताव को यह कहकर खारिज कर दिया था कि भारतीय नेतृत्व इस बात पर कभी नहीं मानेगा।
वॉइट हाउस की बैठक में आया सुझाव – किताब में कहा गया है कि अमेरिकी सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कीथ केलॉग ने 30 जनवरी 2025 को ओवल ऑफिस में बैठक की। ट्रंप ने केलॉग को रूस और यूक्रेन के लिए विशेष दूत नियुक्त किया था। इस बैठक का मकसद यह तय करना था कि यूक्रेन युद्ध खत्म करने में अमेरिका की क्या भूमिका होनी चाहिए।
इस बैठक में ट्रंप के अलावा जेडी वेंस, विदेश मंत्री मार्को रुबियो, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, वॉइट हाउस के डेप्युटी चीफ ऑफ स्टाफ स्टीफन मिलर, तत्कानी अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज और वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट भी शामिल थे। इस दौरान शांति स्थापित करने के लिए लेफ्टिन जनरल केलॉग ने यूक्रेन में शांति के लिए एक प्रस्ताव पेश किया।
इस प्रस्ताव में कहा गया कि अमेरिका रूस के कब्जे वाले यूक्रेनी इलाकों पर रूस के दावों को आधिकारिक मान्यता नहीं देगा, लेकिन यह भी कहा गया कि यूक्रेन सैन्य कार्रवाई के जरिए खोए हुए इलाकों को पाने की कोशिश नहीं करेगा। इस योजना में युद्धविराम की निगरानी के लिए फ्रांस, ब्रिटेन और नीदरलैंड की शांति सेना को यूक्रेन में तैनात करने की बात थी।
NATO सैनिकों की तैनाती पर टेंशन में आए वेंस – वेंस ने नाटो के सदस्य देशों के सैनिकों को भेजे जाने पर चिंता जताई। वेंस को इसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के नाराज होने का खतरा नजर आया। उन्होंने तर्क दिया कि यूक्रेन में NATO सैनिकों की मौजूदगी रूस को उकसा सकती है और अमेरिका के इस संघर्ष में शामिल होने का खतरा बढ़ा सकती है। इसके बाद वेंस ने पूछा कि क्या दूसरे देशों के सैनिक हैं, जो यह काम कर सकते हैं।