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चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर कभी नहीं डूबेगा? एंटी-टॉरपीडो सिस्टम से लैस, भारत-अमेरिकी पनडुब्बियां बेअसर!


चीनी मीडिया में दावा किया गया है कि ‘फुजियान’ एयरक्राफ्ट कैरियर एंटी-टॉरपीडो सिस्टम से लैस है। दावा किया गया है कि यह सिस्टम पारंपरिक डेप्थ चार्ज लॉन्चर की जगह छह-ट्यूब वाले टॉरपीडो सिस्टम का इस्तेमाल करेगा और इसमें ‘हार्ड-किल’ क्षमता यानि दुश्मन के हथियार को नष्ट करने की क्षमता होगी। इसका मतलब ये हुआ कि चीन ने अपने ‘फुजियान’ एयरक्राफ्ट कैरियर में एक ऐसा सिस्टम लगाया है जो टॉरपीडो को हवा में ही खत्म कर देगा जिससे इसे डुबाना काफी मुश्किल होगा।
अगर चीन का दावा सही है तो ये दुनिया का पहला एयरक्राफ्ट कैरियर होगा जिसमें ये क्षमता होगी। साउथ चायना मॉर्निंग पोस्ट में दावा किया गया है कि चीन का फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर दुश्मन की तरफ से आ रहे टॉरपीडो को नष्ट करने के लिए दुनिया का पहला एंटी-टॉरपीडो सिस्टम तैनात कर रहा है। पुराने डेप्थ चार्ज की जगह लेने वाला यह ‘हार्ड-किल’ सिस्टम तेज रफ्तार वाले, रॉकेट से चलने वाले इंटरसेप्टर टॉरपीडो दागता है जो एडवांस्ड, डिकॉय-फिल्टरिंग सोनार से गाइड होते हैं। इससे एडवांस्ड स्टील्थ सबमरीन के खिलाफ बड़े युद्धपोतों की एक मुख्य कमजोरी दूर हो जाती है।
Anti-torpedo system कैसे काम करता है? – एयरक्राफ्ट कैरियर बहुत बड़े और बहुत ज्यादा कीमती होते हैं। लेकिन पनडुब्बियों के लिए इन्हें निशाना बनाना काफी आसान होता है। लेकिन एंटी-टॉरपीडो सिस्टम (ATT) लगाकर चीन पश्चिमी देशों के घातक और तेज रफ्तार वाले पनडुब्बी हथियारों जैसे US MK48 टॉरपीडो का सीधे तौर पर मुकाबला कर सकता है।
ये पूरी प्रक्रिया चार तरह से होती है। -1- एयरक्राफ्ट कैरियर की तरह बढ़ रहे खतरे की पहचान करना
2- खतरे की पुष्टि होने पर इंटरसेप्टर लॉन्च करना
3- रीयल टाइम ट्रैकिंग यानि दुश्मन का टॉरपीडो अगर रास्ता बदलता है तो इंटरसेप्टर भी अपनी दिशा बदलकर उसका पीछा करता है।
4- इंटरसेप्टर टॉरपीडो सीधे दुश्मन के टॉरपीडो से टकराता है या उसके बिल्कुल करीब जाकर ब्लास्ट हो जाता है।
रिपोर्ट के मुताबिक चीन ने 2016 में एक शुरुआती ATT सिस्टम का प्रदर्शन किया था। डिफेंस रिव्यू मैग्जीन की रिपोर्ट में कहा गया है कि फुजियान पर लगा नया ATT सिस्टम ‘डिटेक्शन की सटीकता, नुकसान पहुंचाने की विश्वसनीयता और सिस्टम इंटीग्रेशन के मामले में वर्ल्ड-क्लास लेवल तक पहुंचना चाहिए।’ इसमें यह भी बताया गया कि 2010 के दशक में US नेवी का एंटी-टॉरपीडो टॉरपीडो डिफेंस सिस्टम (ATTDS) प्रोजेक्ट फेल हो गया था और उसका नया हार्ड-किल प्रोग्राम अभी भी चल रहा है।
इसमें दावा किया गया है कि जब यह सिस्टम किसी आ रहे टॉरपीडो को रोकने (इंटरसेप्ट करने) के लिए काम करेगा तो यह PLA के ATT टॉरपीडो को 3 सेकंड के भीतर 50 से 60 नॉट की गति तक पहुंचा सकता है। साथ ही इसमें पावर का सटीक कंट्रोल होगा और शोर भी बहुत कम होगा ताकि इसके अपने सोनार का ऑपरेशन प्रभावी ढंग से हो सके।
भारत के लिए बेहद गंभीर और रणनीतिक मायने – चीनी एयरक्राफ्ट कैरियर में इस क्षमता का होने का मतलब ही भारत के लिए बेहद गंभीर और रणनीतिक मायने होंगे। फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर की कमीशनिंग और आधुनिक तकनीकों जैसे EMALS कैटापुलट के बाद चीन की नौसेना (PLAN) अब हिंद महासागर में अपने कैरियर बैटल ग्रुप की स्थायी तैनाती की ओर कदम बढ़ा सकता है।
यह कैरियर ग्रुप भारत के पड़ोसी देशों में बने चीनी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों जैसे पाकिस्तान का ग्वादर, श्रीलंका का हंबनटोटा और जिबूती का उपयोग करके भारत की समुद्री सीमा को सीधे तौर पर प्रभावित कर सकता है।
भारतीय पनडुब्बियों की मारक क्षमता पर असर – भारतीय नौसेना के पास पारंपरिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों और परमाणु पनडुब्बियों जैसे अरिहंत क्लास का एक मजबूत बेड़ा है। युद्ध की स्थिति में ये सबमरीन दुश्मन के जहाजों पर भारी टॉरपीडो हमला करने की क्षमता रखती हैं। लेकिन फुजियान का यह नया एंटी-टॉरपीडो सिस्टम भारतीय नौसेना की सबमरीन की तरफ से दागे गए भारी टॉरपीडो को हवा/पानी में ही नष्ट कर सकता है। इससे भारतीय पनडुब्बियों का जो पारंपरिक रणनीतिक फायदा था वह कम हो सकता है।
फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर लगभग 80,000 टन का एक विशाल सुपरकैरियर है जो भारत के सबसे आधुनिक स्वदेशी कैरियर INS Vikrant (लगभग 45,000 टन) से आकार और मारक क्षमता दोनों में बहुत बड़ा है। एंटी-टॉरपीडो जैसी अत्याधुनिक रक्षा प्रणाली हासिल करके चीन तकनीक के मामले में भारत से एक कदम आगे निकलने की कोशिश कर रहा है।
भारत के लिए आगे का रास्ता क्या है?- भारत को अपने बेड़े में और ज्यादा न्यूक्लियर-पावर्ड अटैक सबमरीन (SSN) शामिल करने की गति बढ़ानी होगी ताकि वे चीनी सुरक्षा घेरे को भेद सकें।