
भारत और बांग्लादेश भाई-बहनों की तरह हैं। न सिर्फ उनकी सीमाएं जुड़ी हैं बल्कि उनके सपने भी एक जैसे हैं। साथ मिलकर वे एक बड़ी आर्थिक ताकत बन सकते हैं। यह बात गुरुवार को बांग्लादेश में भारत के नए हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने कही हैं। दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त का कार्यभार संभाल लिया है और राजनयिकों की जगह राजनेता को किसी देश में दूत बनाकर भेजने का ये दुर्लभ मामला है। इसके पीछे भारत सरकार की सोच बांग्लादेश के साथ अच्छे संबंध बनाना है।
त्रिवेदी ने एल्गिन रोड स्थित नेताजी भवन में कहा ‘भारत और बांग्लादेश मिलकर सबसे मजबूत लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था के तौर पर उभर सकते हैं और हमें इसी लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करनी चाहिए।’ उन्होंने गुरुवार को वहां नेताजी सुभाष चंद्र बोस को श्रद्धांजलि भी दी। दिनेश त्रिवेदी ने उम्मीद जताई है कि बांग्लादेश और भारत मिलकर सबसे मजबूत लोकतंत्र और दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में से एक के तौर पर उभर सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वे यह लक्ष्य हासिल कर लेंगे।
दिनेश त्रिवेदी बने बांग्लादेश के उच्चायुक्त – कोलकाता में उन्होंने कहा ‘हम भारत और बांग्लादेश के लोगों के लिए यही कामना करते हैं कि हम दोनों मिलकर सबसे मजबूत लोकतंत्र और दुनिया की सबसे मजबूत ताकतों में से एक के रूप में उभरें और हम यही करने जा रहे हैं और मुझे इसमें कोई शक नहीं है कि हम इसे हासिल कर लेंगे।’ आपको बता दें कि दिनेश त्रिवेदी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त के तौर पर नियुक्ति के लिए ‘लेटर ऑफ़ क्रेडेंस’ (प्रमाण-पत्र) मिल गया है और वे आज यानि 12 जून को बेनापोल-पेट्रापोल लैंड पोर्ट के जरिए बांग्लादेश पहुंचने वाले हैं।
उन्होंने बांग्लादेश रवाना होने से पहले कहा उन्हें यकीन है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के 140 करोड़ लोगों ने उन्हें जो अहम जिम्मेदारी सौंपी है उसके लिए वे आभारी हैं। उन्होंने कहा ‘और मुझे इसमें कोई शक नहीं है। इन 140 करोड़ लोगों के साथ-साथ हमारे बांग्लादेश के 20 करोड़ भाई-बहन और माताएं भी हमारे साथ हैं। इसलिए हम सब मिलकर दुनिया में जो कुछ भी हासिल करना चाहेंगे उसे जरूर हासिल करेंगे।’
राजनेता को राजनयिक बनाने का मतलब क्या है? – पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री और वरिष्ठ नेता दिनेश त्रिवेदी एक राजनेता हैं जिन्हें एक राजनयिक की भूमिका दी गई है। वे अपनी राजनीतिक परिपक्वता, भाषा (बंगाली) और रणनीतिक समझ के जरिए भारत और बांग्लादेश के बीच के संवेदनशील रिश्तों को एक नए मुकाम पर ले जा सकते हैं। वे कूटनीति के पारंपरिक दायरे से बाहर जाकर सीधे राजनीतिक स्तर पर संवाद स्थापित कर सकते हैं। पश्चिम बंगाल से जुड़े होने के कारण उन्हें बंगाल और बांग्लादेश दोनों की जमीनी राजनीति और संस्कृति की गहरी समझ है जो ढाका के साथ बातचीत को ज्यादा सहज बनाएगी।
जैसे उन्होंने कार्यभार संभालने से पहले स्पष्ट किया है कि भारत-बांग्लादेश का रिश्ता सिर्फ सीमाओं का नहीं है बल्कि 160 करोड़ लोगों के साझा लोकतंत्र और कल्याण का है। जाहिर तौर पर बांग्लादेश के लोगों के मन में इससे एक सकारात्मक संदेश जाएगा। त्रिवेदी भारत के केंद्रीय रेल मंत्री रह चुके हैं इसीलिए दोनों देशों के बीच व्यापार और यात्रा को सुगम बनाने के लिए वे रेलवे कनेक्टिविटी जैसे मैत्री एक्सप्रेस, मालगाड़ियां को नया बढ़ावा दे सकते हैं। भारत बांग्लादेश के बीच कई विवाद हैं जैसे तीस्ता और गंगा जल समझौता जो त्रिवेदी के लिए किसी चुनौती की तरह होंगे।
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