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मालवीय नगर अग्निकांड: बुझती जिंदगियों के बीच उम्मीद बनकर आए अरमान के गद्दे, 7 लोगों को दी नई जिंदगी


मालवीय नगर की वो काली रात, चीखते लोग और चारों तरफ फैला काला धुआं! इस खौफनाक मंजर के बीच एक नाम उम्मीद की किरण बनकर उभरा — अरमान। जब आग की लपटें सब कुछ स्वाहा करने पर तुली थीं, तब अरमान ने अपने नुकसान की परवाह किए बिना अपनी दुकान के गद्दों और चादरों से ‘जिंदगी का कवच’ तैयार किया। अपनी दुकान के गद्दों को सड़क पर बिछाकर जिंदगियां बचाने वाले अरमान ने इंसानियत की बेहतरीन तस्वीर पेश की।
अरमान को सुबह 5:20 पर उन्हें फोन आया कि उनकी दुकान के सामने होटल में भीषण आग लग गई है। फोन करने वाले ने उन्हें आग से दुकान का सामान बचाने की सलाह दी। जब अरमान पहुंचे तो सामने का हाल देखकर उनके कदम ठहर गए। होटल के ग्राउंड फ्लोर से उठती आग की ऊंची लपटें उठ रही थीं। चारों तरफ अफरातफरी थी। लोग चीख रहे थे।
गद्दों ने दी 7 लोगों को नई जिंदगी, चादरों ने दिया आखिरी सहारा
नुकसान की फ़िक्र किए बगैर दुकान से निकालकर बिछा दिए गद्दे
री चादरें भी दे दीं, उन्हीं की मदद से एंबुलेंस तक लोगों को पहुँचाया
दुकान के गद्दे बने सहारा- अरमान ने एक पल भी गंवाए बिना अपनी दुकान के सभी गद्दे बाहर निकलवाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते करीब 25 से 30 गद्दे सड़क पर बिछा दिए गए। सात लोग ऊपर से नीचे कूदे और सातों की जान बच गई। उस वक्त किसी ने यह नहीं सोचा कि गद्दों का कितना नुकसान होगा या दुकान का कितना माल खराब होगा।
चादरों में लोगों को लाए बाहर – अरमान ने अपनी दुकान की सारी चादरें भी लोगों को दे दीं। उन्हीं चादरों की मदद से घायल लोगों और जली हुई बॉडीज को बाहर लाकर एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। कई लोगों ने मिलकर राहत कार्य को आगे बढ़ाया और मुश्किल घड़ी में एक-दूसरे का सहारा बने। अरमान ने कहा कि लोग मेरे नुकसान की बात कर रहे है, लेकिन मेरा मानना है कि अल्लाह ने आज मुझे कुछ जिंदगियां बचाने की जिम्मेदारी दी थी।