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पाकिस्तान, श्रीलंका और अब बांग्लादेश, चीन ने तीन तरफ से भारत को घेरा, तारिक रहमान ने दिया मोंगला पोर्ट


बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की चीन यात्रा भारत के लिए बड़ा झटका साबित हुई है। बीजिंग में शुक्रवार को तारिक रहमान और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात के दौरान मोंगला पोर्ट के पास एक आर्थिक क्षेत्र (Economic Zone) विकसित करने के लिए समझौता किया है। यह समझौता पहले भारत की मदद से बनने वाले प्रोजेक्ट की जगह लेगा, जिसे बांग्लादेश की पिछली मोहम्मद यूनुस सरकार ने रद्द कर दिया था।
बांग्लादेश और चीन के बीच इस समझौते के बाद अब बांग्लादेश का दूसरे सबसे बड़ा बंदरगाह मोंगला भारत के हाथ से निकल गया है। खास बात है कि पहले इस क्षेत्र के लिए जमीन भारत के लिए ही तय की गई है, लेकिन अब यहां पर चीन की सरकारी कंपनी को काम सौंप दिया गया है।
भारत के हाथ से पूरी तरह निकला मोंगला पोर्ट – इस समझौते पर तारिक रहमान की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए हैं, जो अपनी राजकीय यात्रा पर बीजिंग में थे। बांग्लादेश के अहम रणनीतिक क्षेत्र का चीन के हाथों में जाना भारत के लिए बड़े झटके की तरह है। यह प्रोजेक्ट बंगाल की खाड़ी और व्यापक हिंद महासागर क्षेत्र में चीन की रणनीतिक मौजूदगी को बढ़ा सकता है। बीजिंग ने पाकिस्तान के ग्वादर से लेकर पूर्वी अफ्रीका में जिबूती तक के बंदरगाहों में निवेश किया है।
तीन तरफ से भारत की घेराबंदी – बांग्लादेश के पोर्ट पर पहुंच के साथ ही अब चीन ने भारत की तरफ से घेराबंदी कर दी है। पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट को चीन ने विकसित किया है, तो दक्षिण में श्रीलंका का हंबनटोटा पोर्ट पर भी बीजिंग का कंट्रोल है। अब पूर्व में बांग्लादेश का मोगला पोर्ट बंगाल की खाड़ी में चीनी मौजूदगी को पक्का करेगा।
बेल्ट एंड रोड पहल पर जिनपिंग का जोर – तारिक रहमान से मुलाकात के दौरान शी जिनपिंग ने अपने महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल के लिए भी जोर लगाया। उन्होंने कहा कि चीन बांग्लादेश की नई सरकार के सुचारू कामकाज का समर्थन करता है और ढाका के साथ उच्च-गुणवत्ता वाला बेल्ट एंड रोड सहयोग करने के लिए तैयार है।
तीस्ता प्रोजेक्ट के लिए भी समर्थन – इसके साथ ही दोनों पक्षों ने चटगांव में चीनी आर्थिक और औद्योगिक क्षेत्र को संयुक्त रूप से आगे बढ़ाने पर सहमति जाहिर की। चीन ने बांग्लादेश की तीस्ता नदी प्रबंधन और बहाली परियोजना में समर्थन का वादा किया है, जो भारत की परेशानी बढ़ाने वाला होगा। शेख हसीना की सरकार ने तीस्ता प्रोजेक्ट को भारत को देने को इच्छा जताई थी, लेकिन पहले मोहम्मद यूनुस और अब तारिक रहमान की सरकार इसे लेकर चीन के साथ सहयोग बढ़ा रही है।
तीस्ता मेगा प्रोजेक्ट के लिए चीन का समर्थन का वादा बीजिंग की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके तहत वह बांग्लादेश के साथ एकीकृत जल संसाधन प्रबंधन में गहरा सहयोग चाहता है। बांग्लादेश और भारत के बच 54 नदियां साझा होती हैं। वहीं, दोनों देशों के बीच नदी जल बंटवारे के मुद्द पर तनाव की स्थिति रहती है।